दिवंगत विधायक झनकलाल ठाकुर को श्रद्धांजलि अर्पित की
छिंदवाड़ा/दमुआ/जुन्नारदेव, (दुर्गेश डेहरिया)। 2008 में विलोपित दमुआ विधानसभा और दमुआ निकाय में विकास का पर्याय रहे दिवंगत पूर्व विधायक झनक लाल ठाकुर की श्रद्धांजलि सभा मे शनिवार जिले भर की राजनैतिक सामाजिक हस्तियां पहुँची। ग्रामीण अंचल के तमाम परिचितों ने भी सभा में पहुँचकर ठाकुर परिवार के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त की।
विलोपित विधानसभा के दसवें और आखिरी जन प्रतिनिधि रहे झनक लाल ठाकुर, बाबूजी का 83 वर्ष की उम्र में बीती 5 जनवरी को उनके गृह ग्राम में निधन हो गया । उनके पुत्र आशीष और अतुल ठाकुर ने उनकी राजनीतिक कर्म स्थली रही दमुआ में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया। ताकि क्षेत्र के तमाम लोग उन्हें प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त कर सके। आयोजन में राजनीतिक भावनाओ से परे सभी दलों के पदाधिकारियों सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों जनप्रतिनिधियो ने पहुँचकर पुष्पांजलि दी और स्वर्गीय झनकलाल ठाकुर के प्रति भावनाए व्यक्त की।
मिलनसार मृदुल व्यक्तित्व के धनी थे बाबूजी
श्रद्धांजलि सभा मे पहुँचे लोगों ने स्वर्गीय बाबूजी के प्रति अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा भले ही भौतिक रूप से वे हमारे बीच नही है लेकिन विधानसभा और निकाय दमुआ दोनो के विकास के लिए उनका योगदान ,उनके कार्य और उन्हें क्षेत्र और शहर के भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच सदैव जीवित रखेंगे।
बाबूजी का परिचय दमुआ से सन 2002 के आसपास हुआ था जब वे शासकीय सेवा से निवृति के बाद राजनीति के जरिए जनसेवा करने का माद्दा लिए परासिया के भाजपा कार्यकर्ता सम्मेलन में पधारे थे। उन दिनों दमुआ विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के पास भगवान सिंग गांधी, रामशंकर मिश्रा बन्नू चाचा,रामकिसन साहू महेश साहू जैसे वरिष्ठ कार्यकर्ता थे तो सुनील मालवीय योगेश साहू मोहन पाल भूषण मनेश सज्जन जैसे युवाओं की समर्पित टोली भी थी। कार्यकर्ता भले ही आर्थिक रूप से सक्षम नही थे लेकिन पार्टी के प्रति उनमें समर्पण भाव जबरदस्त था ।ऐसी टीम के साथ बाबूजी ने दमुआ को अपना सेवा क्षेत्र के रुप मे चुना।2002 से जनाधार तैयार करते हुए उन्होंने भाजपा में अपनी जगह बना ली। पार्टी ने 2003 के विधानसभा चुनाव में उन्हें अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया। कांग्रेस से महेश सल्लाम से उनका मुकाबला था। दिवंगत सुनील मालवीय उस समय के मंडल अध्यक्ष योगेश साहू, मोहन पाल की युवा टीम ने बाबूजी के साथ कंधे से कंधा मिला कर काम किया। इस टीम ने जनता के सामने अपने घोषणा पत्र में जनता से दमुआ के लिए 30 बिस्तरों वाला अस्पताल, कालेज भवन और नपा बनाने के वादे किए। भाजपा कार्यकर्ताओं की एकजुटता और समर्पण के साथ प्रदेश भर में चली उमा भारती लहर ने असर बताया और बाबूजी निर्वाचित होकर विधायक बने।
उनके विधायकी से दमुआ जैसी बड़ी और दुर्गम ग्रामीण अंचल वाली विधानसभा में विकास की नयी इबारत लिखी गयी। बाबूजी को प्रशासनिक कार्यो का लंबा अनुभव था। फाइल चलाने में सिद्ध हस्त थे इसी का नतीजा था कि उनके कार्य काल मे तत्कालीन दमुआ विधानसभा में क्षेत्र के विकास के लिए सर्वाधिक 714 करोड़ का बजट लाया गया।
दमुआ से बातरी धोबे सहित सांगाखेड़ा बेल्ट के कई दुर्गम ग्रामीण अंचल में बीटी सड़क मार्गो का जाल बिछना शुरू हुआ। गांवो शहरों से जुड़ने लगे। अपने कार्यकाल में उन्होने क्षेत्र के ग्रामीणों किसानों के लिए जलाशयों की योजनाओं पर काम किया। दमुआ के कांगला और भाखरा, तामिया के चावलपानी में जलाशयों का निर्माण हुआ। इससे क्षेत्र की रंगत बदलने लगी। उनके कार्यकाल के जलाशयों ने आज ग्रामीण अंचल में खेती किसानों का हालत सुधार दी है। तामिया में इको टूरिज्म उन्ही की देन है।
बाबूजी की निपुणता से भरी कार्य शैली ने क्षेत्र में पार्टी और कार्यकर्ताओं में नई जान फूंकने का काम किया। जिले भर की राजनीति में बाबूजी इकलौते ऐसे जनप्रतिनिधि थे जिन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को सम्मान भी दिलाया और उनकी माली हालत में सुधार के लिए बड़ा योगदान दिया। क्षेत्र के सैकड़ो कार्यकर्ता है जिन्हें उन्होंने सक्षम बनाया।
विकास के लिए दलगत भावनाओ से ऊपर उठकर करते थे काम
स्वर्गीय झनकलाल ठाकुर के मिलनसारिता से भरे व्यवहार के सभी कार्यकर्ता कायल रहे कोई भी कार्यकर्ता भले ही वह उनसे अंदरूनी नाराजगी रखता हो यह नही कह सकता कि बाबूजी ने हमारे लिए कुछ नही किया ।यह अलग बात है कि जिनकी इच्छाशक्ति नही थी वे पिछड़ गए। उनका व्यवहार इतना गजब का था कि गुस्से में उनके करीब पहुँचे कार्यकर्ता के कंधे पर जब वे हाथ रखते थे तो गुस्सा काफूर हों जाता था।

दमुआ नपा के मनोनीत अध्यक्ष भी रहे बाबूजी
12 मार्च 10 से 22.10. 2011 तक वे मनोनीत अध्यक्ष भी रहे। इस दौरान मनोनीत पार्षदों मोहन पाल संजय परिहार राजेश्वरी जैन रूपेश मानेराव के साथ मिलकर शहर के विकास में बड़ा योगदान दिया।
