आजादी के सात दशक बाद भी गांव तक नहीं बन पाई सड़क

Brajkishore Bhardwaj
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आजादी के सात दशक बाद भी गांव तक नहीं बन पाई सड़क


आठनेर, (विजय प्रजापति)। देश को आजाद हुए सात दशक बीत चुके हैं। देश डिजिटल इंडिया की तरफ बढ़ रहा है पर, कुछ क्षेत्र ऐसे हैं, जहां आज भी विकास की किरण नहीं पहुंची है। ऐसा ही हाल ब्लॉक बार अंतर्गत ग्राम धायवानी के बाबजई का हैं। जहां आजादी के सात दशक बीतने के बाद भी आज तक गांव तक पहुंचने के लिए सड़क नहीं बनी है।

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आजादी के सात दशक बाद भी गांव तक नहीं बन पाई सड़कगांव में सड़क नहीं होने से आने-जाने में लोगों को काफी परेशानी होती है। बीमारी की हालत में मरीजों को अस्पताल तक पहुंचने में काफी समय लग जाता है।अनसाराम सेलूकरपक्की सड़क न होने के कारण बच्चों को स्कूल ले जाने के लिए गांव में कोई वाहन नहीं आता है। इससे गांव से पाचं किलोमीटर दूर रोड तक पैदल आना पड़ता है।गांव तक आने वाले रास्ते पर मौरंग बिछी होने के कारण वाहन चलाने में काफी परेशानी होती हैं। जिससे आए दिन राहगीर गिरकर चुटहिल हो जाते हैं।यशवंत धुर्वेगांव में सड़क निर्माण के लिए कई बार जिलाधिकारी एवं मुख्यमंत्री जी को ज्ञापन दिया। लेकिन, सड़क निर्माण के लिए अभी तक कोई पहल नहीं हुई है।मालती जय प्रकाश कास्देकर, सरपंच 

गांव में सड़क न होने के कारण ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जबकि इस गांव की दूरी ब्लॉक मुख्यालय से 45 किलोमीटर है। गांव में बीमार पड़ने पर लोग पीड़ित को चारपाई पर लादकर अस्पताल ले जाते हैं। हालांकि, कुछ वर्ष पहले इस रास्ते में मौरंग बिछाने का कार्य प्रारंभ हुआ था, लेकिन वह अभी आधे रास्ते में ही बिछाई जा सकी है।

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ग्रामीणों का कहना है कि हर बार चुनाव के समय नेताओं के द्वारा सड़क बनाने का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन चुनावों के बाद कोई भी नेता गांव की तरफ नहीं देखता है। लोगों ने बताया कि जिलाधिकारी से लेकर कई नेताओं और मंत्रियों को भी गांव में सड़क निर्माण के लिए आवेदन दिया। लेकिन इसके बावजूद भी आज तक प्रशासन ने गांव में सड़क निर्माण के लिए कोई कदम नहीं उठाया है।

गांव में सड़क नहीं होने से आने-जाने में लोगों को काफी परेशानी होती है। बीमारी की हालत में मरीजों को अस्पताल तक पहुंचने में काफी समय लग जाता है।

अनसाराम सेलूकर


पक्की सड़क न होने के कारण बच्चों को स्कूल ले जाने के लिए गांव में कोई वाहन नहीं आता है। इससे गांव से पाचं किलोमीटर दूर रोड तक पैदल आना पड़ता है।

लखन कास्देकर


गांव तक आने वाले रास्ते पर मौरंग बिछी होने के कारण वाहन चलाने में काफी परेशानी होती हैं। जिससे आए दिन राहगीर गिरकर चुटहिल हो जाते हैं।

यशवंत धुर्वे


गांव में सड़क निर्माण के लिए कई बार जिलाधिकारी एवं मुख्यमंत्री जी को ज्ञापन दिया। लेकिन, सड़क निर्माण के लिए अभी तक कोई पहल नहीं हुई है।

मालती जय प्रकाश कास्देकर, सरपंच 

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नमस्कार, मैं ब्रजकिशोर भारद्वाज पिछले 4 सालों से पत्रकारिता, Content Writing, Web Development की फिल्ड में कार्यरत हूँ। मैं Samacharokiduniya.in, Naukarifinder.com, Phonekadoctor.com पर हर तरह के कंटेंट लिखता हूँ।
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