Chhindwara Samachar : बामनवाड़ा संकुल के हाल बेहाल, जिम्मेदार संकुल से नदारत
शिक्षा व्यवस्था हुई चौपट
जुन्नारदेव, (दुर्गेश डेहरिया)। जनपद पंचायत क्षेत्र अंतर्गत संचालित शासकीय स्कूलों में मनमर्जी के काम हो रहे हैं। जिस पर अंकुश लगाने के लिए जनपद पंचायत के शिक्षा समिति के अध्यक्ष गोबरधन यदुवंशी ने सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग छिंदवाड़ा को पत्र लिखकर संकुल केन्द्र बाम्हनवाड़ा के प्रभार से प्राचार्य मनोज श्रीवास्तव को मुक्त कराने का निवेदन किया है। अपने पत्र में श्री यदुवंशी ने उल्लेख किया कि प्राचार्य मनोज श्रीवास्तव हायर सेकेण्डरी स्कूल मोरकुण्ड को संकुल केन्द्र बाम्हनवाड़ा का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था।
इनकी मूल पद स्थापना नन्दन उच्चतर विद्यालय में है। जिनके द्वारा संकुल केन्द्र बाम्हनवाड़ा में माह में एक, दो दिन ही जाते है। जिसके कारण पूरे संकुल केन्द्र में आने वाली समस्त शालाओं में अव्यवस्था फैली हुई है। किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप प्राचार्य द्वारा नही किया जाता है। ज्ञात रहे कि बामनवाड़ा संकुल केंद्र में 40 स्कूल हैं ।जिसमें 30 प्राथमिक मिडिल के 09 हाई स्कूल 01 संचालित हो रहे हैं। इस संकुल केंद्र में 76 शिक्षक पदस्थ हैं।तथा अतिथि शिक्षक 30 हैं। यहां जन शिक्षक के पद पर सुदामा बेहरा कार्यरत है।
जन शिक्षक के द्वारा प्राथमिक और मिडिल स्कूल की मॉनिटरिंग की जाती है। उसके बाद भी क्षेत्र के स्कूल में पदस्थ शिक्षक 3:30 बजे शाला से नदारत हो जाते हैं। जिसके कारण संकुल क्षेत्र में शैक्षणिक स्तर में गिरावट दर्ज की जा रही है। सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि बिना स्वीकृत अवकाश के शिक्षक अनुपस्थित रहते हैं। जिसकी बाद में स्वीकृत ले ली जाती है। इस संकुल केंद्र में सूक्ष्मता से जांच कराई जाए तो अनेकों अनियमितता सामने आएगी।
संकुल प्रभारी के कार्यकाल की जिला प्रशासन सहित स्थानीय प्रशासन भी इनकी सूक्ष्मता से जांच की जाए तो निश्चित ही शासन के मानसा के अनुरूप अन्य को अनियमितता का उजागर होना संभव है संकुल की अधिकांश शालाओं में अपने करीबी एवं रिश्तेदारों को अतिथि शिक्षक बनकर शासन के विपरीत कार्य करना इनकी कर शैली बन गई है बामनवाड़ा हायर सेकेंडरी स्कूल को शासन द्वारा जो सामग्रियां दी गई है।
उनका भी नदारत होना प्रश्न खड़ा हुआ है उक्त शैक्षणिक संस्था की बिंदुवार यदि जांच की जाए तो आने को अनियमित का उजागर होना संभव है इस संकुल के ग्रामीण इलाकों संचालित शैक्षणिक संस्थाएं शासन के निर्देशानुसार संचालित नहीं हो रही है ना ही शिक्षा का न्यूनतम स्तर होना भी चिंता का विषय है छात्र-छात्राओं की दर्ज संख्या संचालित संस्थानों में संख्या से भी काम है।

इस आदिवासी विधानसभा क्षेत्र के जनजाति कार्य विभाग छिंदवाड़ा द्वारा यदि स्थल परीक्षण कर दिया जाए तो अनेकों अनियमिताओं का उजागर होना संभव है उक्त संस्थाओं का स्टोर वेरिफिकेशन किया जाना निश्चित ही जनहित में उचित होगा जिला प्रशासन सहित स्थानीय प्रशासन से जाना अपेक्षा है कि इनकी बिंदुवार जांच कर कार्रवाई की अपेक्षा जनहित एवं शासन हित में उचित होगी।
