श्री कृष्ण, श्री राम जन्म, वामन अवतार और समुद्र मंथन की कथा का किया गया बखान
जुन्नारदेव, (दुर्गेश डेहरिया)। नगर के बाजार क्षेत्र मंगल भवन में चल रही भागवत कथा के चौथे दिन भागवत आचार्य शुभम कृष्ण शास्त्री वृंदावन धाम द्वारा अपनी रसमई वाणी में श्री कृष्ण, श्री राम जन्म, वामन अवतार और समुद्र मंथन की कथा का बखान किया गया।
भगवताचार्य द्वारा सर्वप्रथम भगवान श्री कृष्ण जन्म की कथा का बखान करते हुए बताया गया कि श्री कृष्ण ने काल कोठरी में अंधेरी रात में जन्म लिया उनके जन्म लेते ही चारों ओर प्रकाश पुंज से जगमजगमगाहट हो गई उनकी माता और पिता दोनों की बेड़ियां अपने आप खुल गई उनके पिताजी उफनती हुई जमुना जी से श्री कृष्ण को लेकर गोकुल पहुंचे जहां पर माता यशोदा की गोद में उन्हें रखकर कन्या स्वरूपी देवी को अपने साथ लाए इसके बाद भगवान ने अपनी बाल लीला दिखाई भगवान ने धर्म के प्रचार और पापियों के नाश हेतु धरा पर अवतार लिया श्री कृष्ण ने अपने जन्म को सार्थक करते हुए अनेकों दुष्टों का संहार किया। श्री कृष्ण जन्म पर श्रद्धालु संगीतमय कथा में जमकर झूमे।
यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत – पंडित शुभम कृष्ण शास्त्री
श्री कृष्ण जन्म कथा उपरांत श्री राम जन्म की कथा का बखान किया गया। जिसमें श्री राम के बाल चरित्र और उनके जन्म से जुड़ी मां के बताई गई साथ ही उनके जीवन से प्रेरणा लेने की बात भी कही गई, इसके उपरांत वामन अवतार की कथा बताई गई। जिसमें भगवान विष्णु वामन अवतार लेकर धरती पर अवतरित हुए और उन्होंने राजा बलि जो महादानी और प्रतापी राजा हुआ करते थे उनसे तीन पग धरती मांगी राजा बलि ने भगवान बामन को तीन पग धरती दी जिसमें उन्होंने पहले पग में धरती और दूसरे पग में आसमान नाप लिया तब तीसरा पग कहां रखूं कहकर राजा बलि द्वारा कहा गया कि हे भगवान आप तीसरा पद मेरे सिर पर रखिए इस प्रकार दान की महानता के महत्व को बताया गया।

समुद्र मंथन की कथा के दौरान देवताओं और राक्षसों के मध्य समुद्र मंथन के दौरान अमृत और समुद्र से निकले अनमोल वस्तुओं को प्राप्त करने में होड़ मची रही समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण किया, जिसके बाद उन्हें नीलकंठ नाम मिला साथ ही समुद्र मंथन के दौरान निकले अमृत को देवताओं के मध्य बांटने की कथा का बखान भी किया गया। भागवत कथा के दौरान कथा आयोजक डालचंद दुन्सुआ, लक्ष्मी, दिनेश, चंचल, विनोद, वसुंधरा, लखन, विनोद, दीपक दुन्सुआ सहित अजय वर्मा उमा वर्मा शरद कुशवाहा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
