बाजार बंद को मिला समर्थन, पूर्ण मार्केट बंद पसर सन्नाटा
जुन्नारदेव (दुर्गेश डेहरिया)। कोयलांचल क्षेत्र की पहचान पूर्व में यहां संचालित होने वाली कोयला खदानों से होती थी। लेकिन दिन महिनों और सालों से कोयला उत्पादन में आई कमी से हो रहे घाटे व खदानों में फाल्ट की समस्या से कोयला खान बंद होने की कगार पर पहुंची।
जिससे क्षेत्र का व्यापार चौपट हुआ। देर सबेर क्षेत्र के लोगों ने आर्थिक संकट को देखते हुए इस समस्या पर आवाज भी पूर्व में उठाई लेकिन कोई सफलता नहीं मिली अब एकबार कन्हान एरिया को पेंच में शामिल करने की विभागीय प्रक्रिया प्रारंभ हुई तो जन आंदोलन शुरु हुआ। घाटे की वजह से बंद होती कोयला खदानों से क्षेत्र उजाड़ विरान होने लगा बड़े पैमाने पर बेरोजगारी और व्यापारिक धंधे में उतार चढाव संभावना है। क्षेत्र के लोग पलायन करने पर मजबूर हो रहे है।
बंद होती कोयला खदानों को ज्वलंत मुद्दा बनाया गया और क्षेत्र में रोजगार के संसाधन उपलब्ध कराने व कोयला खदानों को खोलने की मांग वृहद स्तर पर हुई। कान्हान क्षेत्र को बचाए रखने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास किया जाना लगा बीते दिनों रामपुर,तानसी, दमुआ के बाजार के व्यापारियों ने प्रदर्शन किया गया और आज जुन्नारदेव के बाजार को बंद करके एकराय बनी व्यापारी गण की इस पहल को अच्छा प्रतिसाद मिला।
10 बरस पहले उठाई थी आवाज कन्हान बचाओ
तत्कालीन डुंगरिया के आदिवासी नेता रमेश उईके द्वारा वर्ष 2003 में हिंगलाज मंदिर से रामपुर तानसी तक पैदल मार्च निकालकर के क्षेत्र वासियों के लिए खदाने खोलने की जन-जागरूकता चलाई गई। लेकिन इस मुद्दे पर क्षेत्र वासियों ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। इस कारण कोयलांचल की स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है।
केंद्र और राज्य में भाजपा सरकार, फिर भी कोयला खदाने बंद, कोई भी उघोग नही लगे
खैर कोयलांचल के अस्तित्व को बचाए रखने के लिए युद्ध स्तर पर लोगों ने पहल चलाई एक दिवस व्यापारिक प्रतिष्ठान नही खोलकर एकजुटता दिखाई। मध्यप्रदेश ओर केन्द्र में भाजपा की सरकार काबिज होने के बावजूद भी क्षेत्र में कोई बड़ा कारखाने,फैक्ट्री,कोयला खान प्रारंभ कराएं जाने का प्रयास नही किया गया। नही तो स्थानीय लोगों को बड़े पैमाने पर पेट की आग बुझाने के लिए महानगर की ओर कूच कर नहीं पड़ता।

ये खदानें चालू हुई तो बदलेगी कोयलांचल सूरत
आलीवाडा,धाउनार्थ, फेस-3,भाखरा,हार्राडोल टेढ़ी इमली, नारायणी,फेस-4 OCM,दमुआ 22-23
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