नाबालिग युवती के साथ बार-बार बलात्कार करने वाले आरोपी को आजीवन कारावास
बैतूल। नाबालिग युवती के साथ बार-बार बलात्कार करने वाले आरोपी को आजीवन कारावास एवं कुल 7,000रू के जुर्माने से दंडित किया गया।
माननीय विशेष न्यायाधीश, अनन्य विशेष न्यायालय, (पॉक्सो एक्ट) 2012 बैतूल (म.प्र.), ने नाबालिग युवती के साथ बार-बार बलात्कार करने वाले आरोपी राजेश, निवासी-थाना मुलताई, जिला-बैतूल (म.प्र.) को दोषी पाते हुए, धारा 3(2)(अ) एससी/एसटी एक्ट में आजीवन कारावास व 2,000रू. के जुर्माना तथा धारा 376(2)(एन) भादवि व धारा 5(एल)/6 पॉक्सो एक्ट में 20 वर्ष का कठोर कारावास एवं 5,000रू. के जुर्माने से दंडित किया गया।
प्रकरण में म.प्र. शासन की ओर से जिला अभियोजन अधिकारी एस.पी.वर्मा, वरिष्ठ सहायक जिला अभियोजन अधिकारी/अनन्य विशेष लोक अभियोजक ओमप्रकाश सूर्यवंशी द्वारा पैरवी की गई।
घटना का विवरण इस प्रकार है कि पीड़िता ने पुलिस थाना मुलताई में इस आषय की मौखिक रिपोर्ट दर्ज करायी कि उसकी मां 4-5 वर्ष से हनुमान मंदिर में रहकर पेट दर्द का इलाज करा रही है, उसकी आंख में दिक्कत होने से इलाज हेतु वह भी 02 वर्ष से मंदिर आना-जाना करती है। उसकी जान-पहचान की एक लड़की के घर उसका आना-जाना है, वहां आरोपी राजेश करोले आता-जाता रहता था, जिससे उसकी पहचान हो गयी थी।
राजेश उससे कहता था कि वह उसे पसंद करता है, शादी करना चाहता है। वर्ष 2017 जून महिने में राजेश करोले ने उसे घुमाने का कहकर मुलताई लेकर आया था, मुलताई में उसे बस स्टेण्ड के पास देशमुख लॉज में रखा था, वहीं रात में राजेश ने उसके साथ गलत काम करने का बोला, तो पीड़िता ने मना कर दिया, तो राजेश कहने लगा कि हम जल्द ही शादी कर लेगे, क्यों डरती हो, तो वह शादी करने की बात को लेकर उसके भरोसे में आ गयी, उस रात राजेश ने उसके साथ 2-3 बार गलत काम (बलात्कार) किया।
तभी से राजेश करोले लगातार पीड़िता को शादी का झांसा देकर उसके साथ गलत काम (बलात्कार) करता रहा है। पीड़िता की उक्त शिकायत पर आरोपी राजेश के विरूद्ध अपराध दर्ज कर विवेचना में लिया गया, उसका मेडिकल परीक्षण कराया गया, नक्षा-मौका बनाया गया तथा न्यायालय के समक्ष धारा 164 द.प्र.सं. के कथन कराये गये।

आवश्यक अनुसंधान पूर्ण कर विवेचना उपरांत अभियोग पत्र माननीय अनन्य विशेष न्यायालय (पॉक्सो एक्ट) बैतूल म.प्र. के समक्ष विचारण हेतु प्रस्तुत किया गया। विचारण मे अभियोजन ने अपना मामला युक्तियुक्त संदेह से परे प्रमाणित किया जिसके आधार पर माननीय न्यायालय द्वारा आरोपी को दंडित किया गया।
