गुरु गोविन्द सिंह जयन्ती मनाई
बैतूल। सोमवार पौष शुक्ल सप्तमी पर सिक्खों के दसवें व अंतिम गुरू परम पूज्य गुरू गोविन्द सिंह जी की जयंती स्थानीय सरस्वती विद्या मंदिर कालापाठा बैतूल में मनाई गई। जिसमें प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। प्रार्थना सभा में विद्यालय के प्राचार्य संजय उपाध्याय ने गुरु प्रतिमा पर माल्यार्पण किया व गुरु के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सिख धर्म के गुरुओं की कही बातें लिखी हैं जिसे गुरबानी यानी गुरु की वाणी कहा जाता है। यह ईश्वर की कही बातें हैं। यह पंजाबी भाषा की लिपि गुरमुखी में लिखी गई है। गुरमुखी लिपि ईश्वर के मुख से निकली है।

इसलिए गुरु ग्रंथ साहिब को बहुत ही आदर दिया जाता है। इसे गुरुद्वारों के प्रार्थना कक्ष में रखा जाता है। कोई भी वो इमारत जिसमें गुरु ग्रंथ साहिब की प्रति रखी हो और जिसका वहां पाठ किया जाता हो उसे गुरुद्वारा माना जाता है। श्री उपाध्याय ने सभा में उपस्थित छात्रों को बताया कि गुरु गोविंद सिंह जी द्वारा खालसा पंथ की स्थापना, पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब की रचना व अपने अनुयायियों को दिए 52 उपदेशों का पालन उनके अनुयायी करते हैं एवं किस तरह धर्म की रक्षा के लिए मुगलों के साथ 14 युद्ध लड़े और अपने पूरे परिवार का बलिदान दिया। कार्यक्रम में विद्यालय स्टाफ और विद्यार्थिगण बड़ी संख्या में मौजूद थे।
