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Betul Samachar : डिजिटल अरेस्ट के नाम पर कोई ठगे तो घबराएं नहीं, तत्काल पुलिस को दे सूचना
महिलाओं में सावित्रीबाई के जैसा साहस और समर्पण होना आवश्यक
प्रदीपन संस्था ने मनाई सावित्रीबाई फुले की 194 जयंती
बैतूल। प्रदीपन संस्था ने सावित्रीबाई फुले की 194 जयंती शासकीय एकलव्य महिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान कोसमी में मनाई। आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि श्रीमती मीरा एंथोनी, विशेष अतिथि तूलिका पचौरी प्रमिला धोत्रे, निमिषा शुक्ला एवं स्कूल के वरिष्ठ शिक्षक दिलीप कुमार सोनी, श्रीमती स्वाति देशमुख, नारायण गंगारे, सचिन सरले रूपसिंह, अभिषेक चंदेल, शारदा साहू, ज्योति दोहके उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती एवं सावित्रीबाई फुले के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण कर किया गया। ततपश्चात स्वागत गीत के साथ अतिथियों का स्वागत किया गया। प्रदीपन संस्था प्रमुख श्रीमती रेखा गुजरे ने बताया कि सावित्रीबाई फुले के 194 जयंती कार्यक्रम में महिलाओं को सशक्त बनाने और बढ़ते साइबर अपराधों के प्रति जागरूक किया गया।
इस अवसर पर मीरा एंथोनी ने कहा कि सावित्रीबाई फुले एक ऐसी समाजसेवी और शिक्षिका थी जिनके मार्गदर्शन पर हमें चलना चाहिए एवं उनके विचारों को हमें आत्मसात करना चाहिए। आईटीआई प्राचार्य रेवाशंकर ने बताया की सावित्रीबाई फुले एक ऐसी महिला थी, जिन्होंने काफी संघर्षों के बाद में महिलाओं की शिक्षा, विधवा के पुनर्विवाह को बढ़ावा दिया तथा बाल-विवाह जैसी कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई। महिलाओं को शिक्षा का अवसर मिले इसके लिए उन्होंने सन् 1848 में पुणे के भिड़वाड़ा देश का पहला बालिका विद्यालय खोला, जहां पर उन्होंने बालिकाओं को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। उन्होंने यह भी बताया कि सावित्रीबाई फुले का यह संघर्ष इतना आसान नहीं था। उनको रोकने के लिए समाज के कई लोगों द्वारा उनके ऊपर किचड़, गोबर जैसी चीज फेंकी गई, किंतु सावित्रीबाई ने अपनी हार नहीं मानी और अपनी लड़ाई निरंतर जारी रही। उनके इस लड़ाई का परिणाम हुआ कि उन्होंने अपने पति ज्योतिबा फूले के साथ देश में 18 विद्यालय खोले। जिसके कारण आज महिलाओं को शिक्षा के साथ-साथ में अन्य जगह में महिला अपना योगदान दे रही है।
सावित्रीबाई के विचारों और समर्पण को जन जन तक पहुंचाना आवश्यक
तूलिका पचोरी द्वारा ने बताया कि हर महिला में सावित्रीबाई के जैसे साहस और समर्पण होना चाहिए, तभी हम अपने हक और अधिकारों की लड़ाई लड़ सकते हैं और यह दिवस मनाने का उद्देश्य ही भी है कि हम सावित्रीबाई के विचारों , महानता और समर्पण को जन जन तक पहुंचा सके। दीपमाला खातरकर द्वारा बताया कि सावित्री बाई फुले के इस महान कार्य में उनके पति ज्योतिबा फूले का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। हर कदम पर अपनी पत्नी का पूरा सहयोग किया। उनका यह योगदान हमें समाज सेवा, महिला सशक्तिकरण और समाज में बदलाव लाने की महत्वपूर्णता को समझने में मदद करता है और हमें उनके आदर्शों का अनुसरण करके समाज को सुधारने पर संकल्प लेने में प्रेषित करता है। इस दौरान उन्होंने महिलाओं को समाज में समानता की दिशा में प्रेरित किया।
बढ़ते साइबर अपराध से बचने दी जानकारी
चारू वर्मा द्वारा साइबर क्राइम के तहत जानकारी देते हुए बताया कि साइबर क्राइम बढ़ते जा रहे हैं। हमें हमें इन चीजों का ध्यान रखना चाहिए कि हमें कभी भी कोई भी व्यक्ति आधार नंबर, ओटीपी मांगे तो न दे या अन्य तरीके का लालच देकर हमारी पर्सनल जानकारी मांगे तो हमें नहीं देना चाहिए।
साइबर क्राइम इतना अधिक बढ़ गया है कि लोगों को जानकारी नहीं होने के कारण कई लोग इस अपराध का शिकार हो जाते हैं। इसके साथ ही डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर क्राइम पर भी विस्तृत जानकारी के तहत बताया की डिजिटल अरेस्ट जैसे कोई चीज नहीं होती है। इसके नाम पर लोगों को गूमराह कर ठगा जाता है। ऐसे कोई वाक्य आपके साथ हो घबराये नहीं, तत्काल पुलिस को बताएं। कार्यक्रम का संचालन सुश्री प्रतिमा गौरे ने किया। कार्यक्रम में सहयोगी भुमिका अलका नागले, रवि शंकर चवारे एवं सुनिल कुमार की रही।
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