सड़क हादसा होते ही दौड़ पड़ती है ऑटो एम्बुलेंस, बचाई कई जिंदगियां

Brajkishore Bhardwaj
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सड़क हादसा होते ही दौड़ पड़ती है ऑटो एम्बुलेंस, बचाई कई जिंदगियां


मुलताई। तहसील मुख्यालय पर संचालित ऑटो एम्बुलेंस योजना की वजह से विभिन्न सड़क हादसों में घायलों को तत्परता से मदद मिली है। यही नहीं ऑटो चालकों की सक्रियता एवं तत्परता की वजह से कई गंभीर घायलों की जान भी गोल्डन अवर में अस्पताल में उपचार मिलने से बची है। मुलताई तहसील में बैतूल सांस्कृतिक सेवा समिति द्वारा तीन वर्ष पहले ऑटो एम्बुलेंस योजना प्रारंभ की थी और क्षेत्र के प्रतिष्ठित समाजसेवी एवं कपड़ा व्यवसायी दीपेश बोथरा द्वारा योजना के क्रियान्वयन में संयोजक की भूमिका निभाने की जिम्मेदारी स्वेच्छा से सहर्ष स्वीकार की गई थी। मुलताई में तीन वर्ष पहले प्रारंभ किए गए इस जीवन रक्षक प्रकल्प के 5 जनवरी को तीन साल सफलतापूर्वक पूरे हो चुके है।

तीन वर्ष में 97 बार घायलों को मिली ऑटो एम्बुलेंस की मदद

श्री बोथरा ने बताया कि मुलताई क्षेत्र में 5 जनवरी 2020 को ऑटो एम्बुलेंस योजना प्रारंभ होने के बाद 97 सड़क एवं रेल हादसों में घायलों को ऑटो एम्बुलेंस की मदद मिली है। वर्ष 2020 में 34 हादसों में 45 घायलों को, वर्ष 2021 में 32 हादसों में 44 घायलों को एवं वर्ष 2022 में 31 हादसों में 38 घायलों को ऑटो एम्बुलेंस ने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मुलताई पहुंचाया। उक्त 97 हादसों में 127 घायलों को गोल्डर अवर में ऑटो एम्बुलेंस ने अस्पताल में भर्ती कराया और लोगों की जिदंगी बचाई। इसके अलावा तीन शवों का परिवहन भी ऑटो चालकों द्वारा तीन वर्षों में किया गया है। ऑटो एम्बुलेंस योजना के क्रियान्वयन के एसडीओपी नम्रता सोधिया, तत्कालीन टीआई सुरेश सोलंकी द्वारा भी आर्थिक सहयोग किया गया।

3 वर्ष 97 हादसे, 127 घायलों को मुलताई में मिली ऑटो एम्बुलेंस की मदद

समिति अध्यक्ष गौरी पदम ने बताया कि समय-समय पर संयोजक दीपेश बोथरा स्वयं भी योजना के क्रियान्वयन में आर्थिक रुप से भी मदद करते है। शव परिवहन के लिए पूर्व सांसद हेमंत खण्डेलवाल द्वारा ऑटो चालकों को एक हजार रुपए प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। ऑटो एम्बुलेंस वन्य प्राणियों के लिए भी मददगार साबित हुई है। मुलताई में ऑटो चालक द्वारा फोरलेन पर घायल बंदर व एक बछड़े को भी पशु चिकित्सालय पहुंचाया गया यहीं नही योजना के संयोजक दीपेश बोथरा द्वारा भी एक घायल हिरण को अपनी एक्टिवा से पशु चिकित्सालय पहुंचाकर जान बचाई।

बंदर, हिरण और बछड़े की भी बचाई जान, सड़क पर नहीं तड़पते घायल

सड़क हादसों में घायलों को मिलती है तत्परता से मदद
ऑटो एम्बुलेंस योजना मुलताई के संयोजक दीपेश बोथरा ने बताया कि वैसे तो ऑटो एम्बुलेंस योजना से तहसील के सभी ऑटो चालक जुड़े हुए है। ऑटो एम्बुलेंस योजना से जुडऩे के बाद ऑटो चालकों द्वारा सडक़ हादसे में घायलों को तत्परता से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मुलताई या समीपस्थ हॉस्पीटल पहुंचाया जाता है। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्ष में ऑटो चालकों द्वारा जिस तरह से घायलों की मदद की है उससे घायलों को हास्पीटल पहुंचाने का डर अब पूरी तरह खत्म हो गया है। इस योजना में पुलिस प्रशासन स्वास्थ्य विभाग के समन्वय की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

श्री बोथरा ने बताया कि जिला मुख्यालय पर वर्ष 2016 में योजना प्रारंभ होने के बाद बैतूल सांस्कृतिक सेवा समिति की अध्यक्ष गौरी पदम ने एसडीओपी नम्रता सोधिया एवं उनके आग्रह पर मुलताई में योजना प्रारंभ की थी। इस योजना के मुलताई में प्रारंभ होने के बाद कई घायलों को मदद मिली है। घायलों को हास्पीटल पहुंचाने पर ऑटो चालकों को 200 रुपए प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। यदि घटना स्थल से हास्पीटल की दूरी अधिक होती है तो उस हिसाब से राशि में बढ़ोत्तरी भी की जाती है।

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बैतूल सांस्कृतिक सेवा समिति के सचिव भारत पदम, पदाधिकारी जमुना पंडाग्रे, नीलम वागद्रे, ईश्वर सोनी,माधुरी पुजारे, शिवानी मालवीय, प्रचिति कमाविसदार, सुमीत नागले, प्रदीप निर्मले, मेहर प्रभा परमार सहित अन्य ने ऑटो एम्बुलेंस योजना संचालन में सतत सहयोग देने वाले सभी ऑटो एम्बुलेंस चालकों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया है।

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नमस्कार, मैं ब्रजकिशोर भारद्वाज पिछले 4 सालों से पत्रकारिता, Content Writing, Web Development की फिल्ड में कार्यरत हूँ। मैं Samacharokiduniya.in, Naukarifinder.com, Phonekadoctor.com पर हर तरह के कंटेंट लिखता हूँ।
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